3 साल में ₹200 करोड़ कैसे कमाए: बेला विटा फाउंडर की कहानी

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आकाश आनंद ने सिर्फ ढाई साल में अपनी कंपनी का आधा हिस्सा ₹60 करोड़ में बेच दिया। आज वे बताते हैं कि कैसे किसी ने भी छोटे से धंधे को बड़ा बनाया जा सकता है और कहां-कहां भारत में पैसे बनते हैं।

ढाई साल में ₹60 करोड़ की डील

बेला विटा एक स्किन केयर ब्रांड के रूप में शुरू हुआ। ढाई साल तक सिर्फ स्किन केयर प्रोडक्ट्स बेचे - क्रीम, सीरम, अंडर आई क्रीम, बॉडी स्क्रब, फेस वाश। ये सब नीच प्रोडक्ट्स थे जो असली समस्याओं को सॉल्व करते थे।

महीने की ₹2-3 करोड़ की सेल हो रही थी। प्रॉफिटेबल थी कंपनी - 18% का प्रॉफिट, पैसे घर ले जा रहे थे, मजे आ रहे थे।

फिर अनंता कैपिटल आए। आशुतोष तपाड़िया और अकेश कपूर ने कहा: **"आधी कंपनी हमें बेच दो। ₹120-130 करोड़ वैल्यूएशन करेंगे। ₹60 करोड़ पर लेंगे - उसमें से ₹45 करोड़ सेकेंडरी (घर ले जाओ), ₹15 करोड़ प्राइमरी (कंपनी में)।"

आकाश को समझ नहीं आया कि सेकेंडरी-प्राइमरी क्या है। उन्होंने अपने CA को पूछा। CA ने बताया: "भाई, ₹60 करोड़ घर ले जा, ₹15 करोड़ कंपनी में। तुझे ₹75 करोड़ मिल रहे हैं क्योंकि तू प्रॉफिटेबल धंधा चला रहा है।"

आकाश बोले: "मेरी फट गई। ढाई साल की कंपनी के लिए ₹60 करोड़! मुझे यकीन नहीं हुआ। मुझे गूसबम्प्स आ गए।"

जब पिताजी को बताया, तो उन्होंने पंजाबी में गालियां दी और कहा: "जब नशा उतर जाएगा, बेटा, तब बात करेंगे। कौन बेवकूफ है जो हमें इतने पैसे दे रहा है?"

लेकिन डील हो गई। KPMG आ गया, ड्यू डिलिजेंस शुरू हो गई। ट्रांजैक्शन कम्प्लीट हुआ।

वो दिन और आज का दिन

जब डील हुई, उसी इवेंट में दूसरे फाउंडर्स थे जो महीने का ₹1-2.5 करोड़ कर रहे थे। सबने आकाश को गालियां दी: "तू पागल है! शॉर्ट-सेलर है! तेरे में बॉल्स नहीं है! ऐसे कंपनी कौन बेच देता है?"

आकाश ने कहा: "भाई, जिस दिन ₹60 करोड़ मिल रहे हो सामने, उस दिन बेच देनी चाहिए। तुम धंधे तो तीन-चार और बना लोगे, पर एक अपना सेफ्टी नेट क्रिएट कर लो।"

आज वो सब लोग आकाश के ऑफिस आ चुके हैं: "भाई, प्लीज मेरी कंपनी खरीद ले। अनंता से स्ट्रेटेजिक डील करा दे। हमें एक्वायर कर ले। ना प्रॉफिटेबल चल पाए, ना पैसा आ पाया, ना ढंग की सैलरी मिल रही है, ना फंडिंग मिल रही है।"

धंधा बनाओ, स्टार्टअप नहीं

आकाश बोलते हैं: "यह फाउंडर्स को समझना बहुत जरूरी है। जो फाउंडर आज यह बोले कि 'यार, मेरे को स्टार्टअप करना है', उससे तो बात ही मत करना। जो यह बोले 'मुझे धंधा बनाना है', उससे बात करो।

स्टार्टअप एक ग्लैमरस वर्ड है। हमें धंधा करना है। आपको धंधा बनाना है - चाहे वो ₹1 करोड़ महीने का हो, ₹10 करोड़ का, ₹100 करोड़ का। अगर लॉस मेकिंग बना रहे हो, तो आप बेवकूफ हो। लॉस मेकिंग धंधा नहीं है। प्रॉफिटेबल धंधे का मतलब है पैसा।"

हार्टब्रेक से परफ्यूम बिजनेस

बेला विटा परफ्यूम में 2021 में आया। उससे पहले सिर्फ स्किन केयर बनाता था। परफ्यूम बनाने की इंस्पिरेशन? हार्टब्रेक।

आकाश बताते हैं: "मेरी फर्स्ट लव बहुत रिच बैकग्राउंड से थी। वो Ralph Lauren Romance परफ्यूम लगाती थी। ब्रेकअप हो गया, बेस्ट फ्रेंड से शादी हो गई उसकी। अब जब भी मैं किसी मॉल में जाऊं और Ralph Lauren Romance की खुशबू आए, मेरे को उसकी याद आती थी।

मैंने सोचा: अगर परफ्यूम मुझे टाइम ट्रैवल करा सकता है, तो सबसे पहला परफ्यूम Ralph Lauren Romance का लॉन्च करूंगा। पहला लॉन्च किया Bella Vita Glam - वो Ralph Lauren Romance जैसा है।

अगर भारत के 90% लोग - लड़के और लड़कियां - वो फीलिंग ले पाएं जो मुझे मिली, पर वो ₹8,000 का परफ्यूम था, तो क्यों नहीं? अगर तुम ₹500 में बहुत अच्छी चीज की खुशबू ले रहे हो, तो so be it!"

कॉपी बनाना गलत नहीं है?

लोग पूछते हैं: क्या किसी बड़ी चीज का कॉपी बनाके सस्ते में देना गलत नहीं है?

आकाश का जवाब: **"कोई प्रॉब्लम नहीं है। जारा का कांसेप्ट पता है? जारा के डिजाइनर्स बैठे हुए हैं चाइना, बांग्लादेश की फैक्ट्रियों में। जो पहले कोई भी बड़ी ब्रांड - Balenciaga से लेकर LV तक - निकालेगी, वो 5 दिन के अंदर जारा की फैक्ट्री में कॉपी होगा।

जारा वर्ल्ड की बिगेस्ट अपैरल ब्रांड है। मैं जारा के स्लिपर शूज पहने हुए हूं - ये Louis Vuitton की बिल्कुल कॉपी हैं।

कंज्यूमर्स स्टाइल चाहते हैं, कंफर्ट चाहते हैं, लग्जरी चाहते हैं - और पैसे नहीं देना चाहते। सबको पैसे बचाना है। तो why not?"**

जब तक आप दूसरे का ब्रांड नेम यूज नहीं कर रहे, बिल्कुल सेम चीज नहीं बना रहे, अपना ट्विस्ट डाल रहे हो - कोई प्रॉब्लम नहीं है।

भारत में पैसे कहां बनेंगे?

आकाश तीन-चार बिजनेसेस बताते हैं जहां अभी भी बहुत पैसा है:

1. फूड न्यूट्रिशन स्नैकिंग: टियर 2-टियर 3 में ट्यूमबल ब्रांड खोलो। 100-200 करोड़ की कंपनी बनेगी बड़े आराम से। अगर ₹2.5-3 करोड़ महीने की कंपनी बना देते हो, तो आप ₹100 करोड़ के आदमी हो।

2. बेवरेज: दो-तीन साल में कोल्ड चेन सॉर्ट हो जाएगी। उसके बाद बेवरेज में बिकेगा। लोकल ड्रिंक्स बिकेगी - जलजीरा वगैरह। दिल्ली में एक कंपनी Aarohi Lemon - लेमनेड स्प्राइट का वर्जन बेचती है, पागलों की तरह बिक रही है।

3. मैन्युफैक्चरिंग: खासकर हेल्दी स्नैकिंग की। सस्ती, न्यूट्रिशस, कम जंक। वॉल्यूम्स होंगी तो प्लांट बेटर चलेगा।

4. ग्लोबल एक्सपोर्ट: इंडिया से ग्लोबली बेचना बहुत आसान हो गया है। अमेरिका में स्किन केयर और ब्यूटी पर 0% ड्यूटी है। शिप रॉकेट जैसी कंपनीज ने ग्लोबल शिपिंग खोल दी। लॉजिस्टिक बहुत आसान है।

फाउंडर्स की तीन बड़ी गलतियां

गलती #1: पहले फंडिंग चाहिए यह गलत है। पेपर पर फंडिंग सिर्फ तब मिलती है जब आप कुछ उखाड़ चुके होते हो। पहले प्लान बनाओ, एक लेवल तक एग्जीक्यूट करो, वर्किंग मॉडल बना लो, फिर फंडिंग मांगो।

गलती #2: जॉब के साथ स्टार्टअप बहुत फाउंडर्स कहते हैं: "सर, दिन के 2-3 घंटे और वीकेंड दे देते हैं, जॉब भी चल रही है।" नहीं चलेगा। जो सूडो-एंटरप्रेन्योर्स हैं, जो कह रहे हैं "मैं जॉब भी करूंगा और स्टार्टअप भी शुरू करूंगा" - ना जॉब चलेगी ना स्टार्टअप। दोनों में फट जाएगी।

आप 6 महीने और जॉब करो, खर्चे काटो, अगले 6 महीने के पैसे निकाल लो, जॉब क्विट करो, फिर स्टार्टअप शुरू करो।

गलती #3: बहुत बड़ा सोचना, तुरंत लोग सोचते हैं: "50 SKUs से शुरू नहीं किया तो कंपनी नहीं चलेगी।" गलत। एक प्रोडक्ट से शुरू करो। जादूगर केवल एक ही डिटर्जेंट बेचता है।

पहले एक प्रोडक्ट लॉन्च करो, कस्टमर बुलाओ, फिर और जोड़ो।

मंडी में दुकान खोलो, हाईवे पर नहीं

आकाश समझाते हैं: "अगर आपको जूते की दुकान खोलनी है, तो दो ऑप्शन हैं: एक - हाईवे पर बड़ा सुपर सेक्सी शोरूम। दो - जूतों की मंडी के बीच में सिर्फ 20x20 फुट की दुकान।

आप कहां खोलोगे? मंडी में। जहां दिन का 100 कस्टमर आ रहा है, 10 दुकानें हैं, तो आपके पास दिन का 3-4 कस्टमर तो आएगा ही।

Similarly, D2C versus marketplaces: आप शुरू में मार्केटप्लेस (Amazon, Flipkart) में विजिबिलिटी बना लो। डिस्कवरेबिलिटी आए। 200-250 यूनिट्स डेली ट्रांजैक्शन मार्केटप्लेस पर चाहिए, उसके बाद अपना D2C स्टोर खोलो।"

आखिरी बात

आकाश ने 3 साल में ₹200 करोड़ कमाए - कैश इन बैंक ₹75 करोड़, पेपर मनी उससे भी ज्यादा। यह सब इसलिए हुआ क्योंकि उन्होंने धंधा बनाया, स्टार्टअप नहीं। प्रॉफिटेबल बनाया, लॉस में नहीं चलाया। और जब सही समय आया, तो बेचने से नहीं डरे।

उनकी सलाह: "Think big, but go slow. धीरे-धीरे बनाओ, लेकिन जिस दिन प्रोडक्ट-मार्केट फिट मिल जाए, उस दिन पागल हो जाओ।"


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