क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ लोग हर हाल में पैसा कमा लेते हैं, और कुछ लोग कितनी भी मेहनत करें, पैसा टिकता ही नहीं? इसका जवाब न आपकी किस्मत में है, न परिस्थितियों में - बल्कि यह आपके और पैसे के बीच के रिलेशनशिप में छुपा है।
लॉ ऑफ अट्रैक्शन कोई जादू नहीं है। यह शुद्ध विज्ञान है - वही विज्ञान जो आपने सातवीं कक्षा में फिजिक्स में पढ़ा था।
फिजिक्स के तीन मूल नियम हैं: पहला - ब्रह्मांड में हर चीज़ ऊर्जा है। दूसरा - हर ऊर्जा की अपनी एक विशिष्ट फ्रीक्वेंसी होती है। तीसरा - समान फ्रीक्वेंसी वाली ऊर्जाएँ एक-दूसरे को आकर्षित करती हैं।
रेडियो का उदाहरण लीजिए। 93.5 FM को ट्यून करने पर आप 101.1 FM नहीं सुन सकते। यह डिबेटेबल नहीं है - यह साइंस है। ठीक इसी तरह, अगर आपकी मनी फ्रीक्वेंसी ₹10,000 वाली है, तो ₹1 करोड़ आपकी ओर आकर्षित नहीं होंगे - भले ही आप दिन-रात मेहनत करते रहें।
भगवत गीता में भी यही कहा गया है: "जैसी करनी, वैसी भरनी।" यानी जिस फ्रीक्वेंसी पर आप कंपन करते हैं, वही फ्रीक्वेंसी आप अपनी ओर खींचते हैं।
लोग इसलिए गरीब नहीं रहते क्योंकि अवसर नहीं हैं। वे इसलिए गरीब रहते हैं क्योंकि पैसे के साथ उनका रिलेशनशिप बेहद खराब है।
तीन टेल साइन पहचानें जो बताते हैं कि आपकी मनी फ्रीक्वेंसी ब्लॉक है।
क्या आपके साथ बार-बार यही होता है? पैसा आता है, अचानक कोई खर्च आता है और पैसा खत्म हो जाता है। जॉब आती है, फिर कोई निकाल देता है। प्रमोशन मिलने वाला था और वो पोजीशन ही गायब हो गई। यह पैटर्न आपकी लाइफ की फाइनेंशियल फ्रीक्वेंसी दिखाता है।
बैंकरप्ट होना और बैंकरप्ट फील करना - ये दो बिल्कुल अलग चीज़ें हैं। एलन मस्क तीन बार बैंकरप्ट हुए, लेकिन क्या उन्होंने कभी बैंकरप्ट फील किया? कुछ लोगों के पास ₹37 लाख सालाना आ रहे हों, फिर भी वे गरीब फील करते हैं। यह मनी फ्रीक्वेंसी की खराबी है।
क्या आप मानते हैं कि "पैसा सिर्फ मेहनत से आता है", या "फ्री में मिला पैसा अच्छा नहीं होता", या "पैसा कमाना बहुत मुश्किल है"? ये सभी लिमिटिंग बिलीफ्स हैं जो पैसे को आपसे दूर रखते हैं।
90% लोग जो आज पैसे से जूझ रहे हैं, उनकी समस्या उनके बचपन से शुरू होती है। एक 5 साल का बच्चा जब देखता है कि मम्मी रोते हुए कह रही है - "तेरे पापा ने जिंदगी बर्बाद कर दी, पैसा पेड़ पर नहीं उगता" - तो यह बातें उसके सबकॉन्शियस माइंड में गहरी उतर जाती हैं।
बड़े होकर वो भूल जाता है, लेकिन बॉडी याद रखती है। यही वो प्रोग्रामिंग है जो उसे इंटरव्यू में कुछ ऐसी बात कहला देती है जिससे नौकरी हाथ से निकल जाती है। फिर वो कहता है - "लॉ ऑफ अट्रैक्शन काम नहीं करता।"
सच यह है कि लॉ ऑफ अट्रैक्शन ने उस तक अवसर पहुँचाया था - लेकिन उसकी अपनी फ्रीक्वेंसी ने उसे स्वीकार नहीं करने दिया।
माता-पिता के ज़ख्म ही बॉस और पार्टनर से समस्याएँ बनते हैं। जो शिकायतें आपकी माँ से थीं, वही शिकायतें आपको अपने बॉस से होंगी। जो घाव पिता से मिले, वही ज़ख्म जीवनसाथी के साथ दोहराए जाएँगे।
अगर आपके बचपन के घाव ठीक हो गए हों, तो यह रूटीन जादू की तरह काम करता है।
सुबह उठते ही: 10 रैंडम चीज़ों के लिए थैंक यू बोलें - जो दिमाग में आए, उसके लिए। कोई तय लिस्ट नहीं, बस रैंडम ग्रेटिट्यूड।
मैजिक वाटर: रात को पानी की बोतल पर लिखें कि आपको जिंदगी में क्या चाहिए। सुबह उठकर वो पानी पीएँ।
विज़न बोर्ड देखें: जो अफर्मेशन्स हैं वो पढ़ें। दिन की शुरुआत अपने सपनों के साथ करें।
दिन में नेगेटिव वर्ड आए तो: तुरंत बोलें - "कैंसिल, कैंसिल।" जितना आप कहेंगे "मुझे ऐसे लोग क्यों मिलते हैं", उतना ही और ऐसे लोग आते जाएँगे। इसलिए उस नेगेटिव को कैंसिल करें।
Ho'oponopono टेक्निक: जब कोई नेगेटिव अनुभव हो, तो यह चार वाक्य बोलें - "I am sorry, Please forgive me, Thank you, I love you." यह नेगेटिव एनर्जी को ट्रांसफॉर्म करती है।
रात को सोने से पहले: अपनी अफर्मेशन्स पढ़ें - हेल्थ, रिलेशनशिप, करियर और पैसे के लिए। फिर सो जाएँ।
लेकिन याद रखें - यह रूटीन तब तक पूरा काम नहीं करेगा जब तक आपके मनी ब्लॉक्स रिलीज़ न हों। इसके लिए EFT (Emotional Freedom Technique) एक वैज्ञानिक तरीका है।
शरीर में कुछ एनर्जी मेरीडियन पॉइंट्स होते हैं जहाँ नेगेटिव इमोशन्स जाकर ब्लॉक हो जाते हैं। जब आप इन पॉइंट्स पर टैप करते हुए अपनी फीलिंग को स्वीकार करते हैं, तो वो ब्लॉक्स रिलीज़ होने शुरू होते हैं।
टैपिंग पॉइंट्स हैं: भौंहों की शुरुआत, आँख के बाहरी कोने के नीचे, नाक के नीचे, ठोड़ी पर, कॉलर बोन, बगल के नीचे, और उँगलियों के नेल की साइड।
जब भी कोई मनी ब्लॉक महसूस हो - जैसे "फ्री पैसा मुझे नहीं चाहिए" या "मैं इसके लायक नहीं हूँ" - तो इन पॉइंट्स पर टैप करते हुए कहें: "इन सब के बावजूद, मैं खुद से प्यार करता हूँ और खुद को स्वीकार करता हूँ।" पाँच राउंड में ब्लॉक की इंटेंसिटी शून्य हो जाती है।
कर्मा का अर्थ है एक्शन। एक्शन यानी फ्रीक्वेंसी। फ्रीक्वेंसी वही अट्रैक्ट करती है जो वो है। अगर आपने किसी के साथ बुरा किया, तो उस व्यक्ति की नेगेटिव एनर्जी आपको इंपैक्ट करती है - क्योंकि एनर्जी लेवल पर हम सब एक हैं।
इसीलिए "जैसी करनी, वैसी भरनी" - यह सिर्फ नैतिक उपदेश नहीं, बल्कि फिजिक्स का नियम है।
गरीब और अमीर के बीच सबसे बड़ा फर्क यह है: गरीब अपनी वर्तमान सच्चाई पर विश्वास करता है। अमीर होने वाला उस सच्चाई पर विश्वास करता है जो अभी आई नहीं है - वो पहले से उसी फ्रीक्वेंसी पर जीना शुरू कर देता है।
बिलीफ के लिए बिलीफ जरूरी नहीं है। सिर्फ रिपीटिशन जरूरी है। जो बात बार-बार दोहराई जाती है, वो बिलीफ बन जाती है। आतंकवादियों का ब्रेनवॉश इसी सिद्धांत पर होता है - बस वही प्रक्रिया आप पॉजिटिव दिशा में इस्तेमाल करें।
याद रखें: "पैसा न कमाना स्वीकार्य नहीं है।" और अपनी जिंदगी में एक ऐसा इंसान खोजें जो आप पर आपसे ज़्यादा विश्वास करे - क्योंकि प्यार का असली मकसद किसी ऐसे को खोजना है जो आप पर विश्वास करे।
Stop Solving, Start Involving - Frequency बदलो - पैसा अपने आप आ जाएगा।